जीवन में जब भी बोलो मीठा बोलों

कहते है - 
    *शब्दों के दांत नहीं होते है*
     *लेकिन शब्द जब काटते है*
      *तो दर्द बहुत होता है और   कभी-कभी*
       *घाव इतने गहरे हो जाते है कि*
         *जीवन समाप्त हो जाता है*
           *परन्तु घाव नहीं भरते !!*

*इसलिए जीवन में जब भी बोलो मीठा बोलों*
      *एक 'शब्द' औषधि करे,*
   *और एक 'शब्द' करे 'सौ' 'घाव',,,!*
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